AWA ROYALS
देश के सबसे दानवीर राजा , दूसरे दानवीर कर्ण की कहानी का कुछ हिस्सा
एटा, फ़िरोज़ाबाद, मथुरा व आगरा जिलों की पहचान,
महाराजा बलवंत सिंहजी(अवागढ़)
"महा दानवीर, क्रन्तिकारी, समाजसेवी व देश की तरक्की के लिए सब कुछ न्योछावर कर देने वाले व्यक्ति को नहीं मिला कोई सम्मान"
राजा बलवंत सिंह जी का जन्म सन 1853 में उत्तर प्रदेश के ज़िला एटा की धरती पर अवागढ़ रियासत में हुआ था , और सन 1890 में वे अवागढ़ रियासत के महाराजा बने। वैसे तो महाराजा साहब का परिचय किसी का मोहताज नहीं है, उनका नाम मात्र ही उनकी पहचान बताने के लिए काफी है, उनके ही राष्ट्रहित और कल्याणकारी कार्यों की वजह से आज उत्तर प्रदेश के एटा जिले के छोटे से कसबे अवागढ़ का नाम सम्पूर्ण भारत वर्ष में जाना जाता है। राजा साहेब बहुत ही सरल व सहज प्रवर्ति के व्यक्ति थे। आज कल के लोग यदि एक बार किसी पद पर बैठ जाएं तो हमेशा उस पद को पूर्व लगाकर अपने नाम से जोड़ते हैं और निजी स्वार्थ के चक्कर में अपने पद का दुरूपयोग करने से कभी नहीं चूकते , किन्तु बलवंत सिंह जी एक ऐसी शख़्सियत थी जिन्होंने कभी भी अपने नाम का प्रचार नहीं किया, उनकी रियासत उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बडी रियासत थी और ऊपरी भारत की सबसे धनी रियासत भी थी। राज गद्दी के अलावा बलवंत सिंह जी देश की राजनीती में भी हमेशा सक्रिय रहे, वे लेजिस्लेटिव कौंसिल के सदस्य रहे यानी कि MLC रहे, उसके बाद उन्हें OBE, CIE की उपाधि प्रदान की गई, बलवंत सिंह स्वयं पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन बिना पढ़े होने के बावजूद भी उनकी बुद्धि का मुकाबला राज्य में किसी का नहीं था, उन्होंने अपनी इसी बुद्धि से अवागढ़ जागीर को उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी रियासत बना दिया जिसकी सीमा एटा, आगरा, फ़िरोज़ाबाद, अलीगढ़, फतेहपुर सीकरी, मैनपुरी तथा मथुरा जिलों तक फैली हुई थी।
अवागढ़ एस्टेट उत्तर प्रदेश ही नहीं सम्पूर्ण ऊपरी भारत की सबसे धनी जागीर थी, यह सब राजा साहब की ही मेहनत की देन था।
According to British authentic records, Raja Awa was the most wealthiest properieters in the whole upper Indian doab.
राजा बलवंत ऊपरी भारत के सबसे धनी होने के साथ साथ सबसे दानवीर भी थे, उन्हें पढ़े लिखे ना होने का दर्द हमेशा सताता था, इसलिए उन्होंने सन 1885 में आगरा में राजपूत हाई स्कूल की स्थापना की, उसके बाद लगातार उनके प्रयासों से ये कॉलेज बढ़ता गाया, आज ये कॉलेज राजा बलवंत सिंह कॉलेज (आर० बी० एस० कॉलेज आगरा) के नाम से जाना जाता है,आज ये कॉलेज एशिया का सबसे बड़ा केम्पस वाला कॉलेज है, राजा साहब ने इस कॉलेज के विकास के लिए लाखों की धनराशि व् पेश कीमती ज़मीं जायजाद दान की, इसके बाद इस कॉलेज में उनके वशंजों द्वारा हज़ारों एकड़ जमीन और लाखों रुपया दान दिया गया, इस कॉलेज का संबंध दो दो यूनिवर्सिटी, डॉ भीमराव अमबेडकर आगरा और APJ अब्दुल कलाम यूनिवर्सिटी से है। ये आगरा यूनिवर्सिटी का एक मात्र A+ ग्रेड कॉलेज है। राजा साहब की दानवीर होने की कहानी यहीं खत्म नहीं होती, उन्होंने गुरुदेव यानी कि रवीन्द्र नाथ ठाकुर की शांतिनिकेतन बनाने में बहुत मदद की, आर्थिक सहायता की।
उनके द्वारा आरबीएस कॉलेज , शांतिनिकेतन, राजा उदय प्रताप कालेज वाराणसी जैसे कई शिक्षण संस्थानों में योगदान दिया गया।
"राजा साहब ने पंडित मदन मोहन मालवीय के साथ मिल कर अंग्रेज़ी हुकूमत से लड़ाई लड़ी और हिंदी भाषा को सरकारी भाषा का दर्जा दिलवाया।"
राजा साहब ने ही 1897 में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की स्थापना की थी और प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे ।
लिखने को इतना कुछ है कि खत्म नहीं होगा, इतने किस्से हैं इस दानवीर के की कागज़ और कलम कम पड़ेंगे, उनके कारण आज देश भर में एटा ज़िले को पहचाना जाता है।
इतना सब होने के बावजूद उनके परिवार के लोग बड़ी ही सादगी के साथ अपना जीवन जीते हैं, जनता के बीच आम आदमी की तरह आते हैं। उनके वंशज राजा अनिरुद्ध पाल सिंह और उनके पुत्र युवराज अम्बरीश पाल सिंह नैनीताल में अवागढ़ स्टेट की देख रेख करते हैं, हेरिटेज होटल चलाते हैं, खेती और व्यापार करते हैं, उनके एक और वंशज राजा जितेंद्र पाल सिंह जी और राजकुमार ऋषि राज जी राजस्थान में अपने हज़ारों एकड़ के फार्म्स की देखरेख करते हैं, कई होटल चलाते हैं, नेस्ले को कॉफ़ी ब्रीड की सप्लाई जैसे कई व्यापार करते हैं,
एक और वंशज राजा यादवेन्द्र पाल सिंह जी आगरा में अवागढ़ फार्म्स की देख रेख करते हैं व खेती करवाते हैं और उनके पुत्र कुँ० भूमेन्द्र पाल सिंह दिल्ली में एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाते हैं। उनके सारे वंशज ईमानदारी, सादगी और शाही तरीके के साथ अपना जीवन जीते हैं।
राजकुमार ऋषिराज घुड़सवारी के महारथी हैं, वे राजस्थान में अपनी एक हॉर्स सफारी चलाते हैं, वे शूटिंग और गाड़ियों के भी काफी शौकीन हैं, वे क्षत्रिय संगठनों और हिन्दू सभाओं में अक्सर सक्रिय रहते हैं।
कुं०भूमेन्द्र पाल कम्प्यूटर्स के साथ साथ वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरी के भी शौकीन हैं और कई अवार्ड भी पा चुके हैं, वे क्षत्रिय महासभा के पदधिकारी हैं।
युवराज अम्बरीश बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के सचिव हैं और RBS सहित 12 शिक्षण संस्थान चलाते हैं, उन्होंने अपने गृह क्षेत्र अवागढ़ में शिक्षा का स्तर बढाने के लिए राजमाता अनंत कुमारी पब्लिक स्कूल का शुभारम्भ किया है, वे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और राजनीति में सक्रिय रहते हैं।
अवागढ़ परिवार आज भी अवागढ़ किला को अपने निजी आवास के रूप में प्रयोग करता है।
अवागढ़ का किला उत्तर प्रदेश में दूसरा सबसे बडा किला है और सबसे बड़ा निजी आवास भी है।
राजा बलवंत सिंह के देश के प्रति त्याग के कारण पिछड़े इलाके में शिक्षा का स्तर बढ़ा और उनके बनाये हुए कॉलेज से लाखों छात्रों ने शिक्षा प्राप्त की। आरबीएस कॉलेज के द्वारा क्षेत्र में हज़ारों लोगों को रोज़गार मिला, देश को कई अनमोल रत्न मिले। इस कालेज ने देश को कई रत्न प्रदान किये हैं। इस कॉलेज से पढ़कर एक व्यक्ति देश का रक्षा मंत्री व् उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना, मैं बात कर रहा हूँ देश के जाने मने नेता सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की , मुलायम सिंह के अलावा यहाँ उनके भाई राजयसभा सांसद व् सपा के प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव ने भी अपनी शिक्षा यहीं से प्राप्त की। देश के जाने माने अभिनेता, राजयसभा सांसद व् कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने बह इसी कॉलेज से अपनी पढाई पूरी की है। इसी कालेज से पढ़े हुए NAAC के डायरेक्टर डॉ० धीरेन्द्र सिंह जादौन वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के चेयरमैन बने हैं। इसके अलावा अन्य कई जाने माने चेहरों ने इसी महाविद्यालय से पढ़कर देश का नाम रोशन किया है।
क्या भारत की सरकार द्वारा इन्हें कोई सम्मान नहीं देना चाहिए ?
क्या मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल यादव और राज बब्बर जैसे बड़े नेताओं को इनके लिए कोई आवाज़ उठानी नहीं चाहिए थी ?
भारत में जिस भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान में सरकार है उस भाजपा के संस्थापक व् प्रथम अध्यक्ष राजा बलवंत सिंह के सुपुत्र राव कृष्ण पाल सिंह जी ही थे, क्या भाजपा इस बात को भूल चुकी है, या भाजपा में बुजुर्गों का अपमान करना ही परंपरा बन चुका है ?
महाराजा बलवंत सिंह जी के कार्यों को देखते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करा जाना चाहिए, ऐसा नहीं हो रहा है तो यही कहा जा सकता है की इस देश में सच्चे ईमानदार क्रांतिकारियों की कोई इज़्ज़त नहीं है और सारे राष्ट्रीय सम्मान सिर्फ राजनेताओं के लिए ही बने हैं।
- ऋषभ चौहान (मनु)
देश के सबसे दानवीर राजा , दूसरे दानवीर कर्ण की कहानी का कुछ हिस्सा
एटा, फ़िरोज़ाबाद, मथुरा व आगरा जिलों की पहचान,
महाराजा बलवंत सिंहजी(अवागढ़)
"महा दानवीर, क्रन्तिकारी, समाजसेवी व देश की तरक्की के लिए सब कुछ न्योछावर कर देने वाले व्यक्ति को नहीं मिला कोई सम्मान"
राजा बलवंत सिंह जी का जन्म सन 1853 में उत्तर प्रदेश के ज़िला एटा की धरती पर अवागढ़ रियासत में हुआ था , और सन 1890 में वे अवागढ़ रियासत के महाराजा बने। वैसे तो महाराजा साहब का परिचय किसी का मोहताज नहीं है, उनका नाम मात्र ही उनकी पहचान बताने के लिए काफी है, उनके ही राष्ट्रहित और कल्याणकारी कार्यों की वजह से आज उत्तर प्रदेश के एटा जिले के छोटे से कसबे अवागढ़ का नाम सम्पूर्ण भारत वर्ष में जाना जाता है। राजा साहेब बहुत ही सरल व सहज प्रवर्ति के व्यक्ति थे। आज कल के लोग यदि एक बार किसी पद पर बैठ जाएं तो हमेशा उस पद को पूर्व लगाकर अपने नाम से जोड़ते हैं और निजी स्वार्थ के चक्कर में अपने पद का दुरूपयोग करने से कभी नहीं चूकते , किन्तु बलवंत सिंह जी एक ऐसी शख़्सियत थी जिन्होंने कभी भी अपने नाम का प्रचार नहीं किया, उनकी रियासत उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बडी रियासत थी और ऊपरी भारत की सबसे धनी रियासत भी थी। राज गद्दी के अलावा बलवंत सिंह जी देश की राजनीती में भी हमेशा सक्रिय रहे, वे लेजिस्लेटिव कौंसिल के सदस्य रहे यानी कि MLC रहे, उसके बाद उन्हें OBE, CIE की उपाधि प्रदान की गई, बलवंत सिंह स्वयं पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन बिना पढ़े होने के बावजूद भी उनकी बुद्धि का मुकाबला राज्य में किसी का नहीं था, उन्होंने अपनी इसी बुद्धि से अवागढ़ जागीर को उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी रियासत बना दिया जिसकी सीमा एटा, आगरा, फ़िरोज़ाबाद, अलीगढ़, फतेहपुर सीकरी, मैनपुरी तथा मथुरा जिलों तक फैली हुई थी।
अवागढ़ एस्टेट उत्तर प्रदेश ही नहीं सम्पूर्ण ऊपरी भारत की सबसे धनी जागीर थी, यह सब राजा साहब की ही मेहनत की देन था।
According to British authentic records, Raja Awa was the most wealthiest properieters in the whole upper Indian doab.
राजा बलवंत ऊपरी भारत के सबसे धनी होने के साथ साथ सबसे दानवीर भी थे, उन्हें पढ़े लिखे ना होने का दर्द हमेशा सताता था, इसलिए उन्होंने सन 1885 में आगरा में राजपूत हाई स्कूल की स्थापना की, उसके बाद लगातार उनके प्रयासों से ये कॉलेज बढ़ता गाया, आज ये कॉलेज राजा बलवंत सिंह कॉलेज (आर० बी० एस० कॉलेज आगरा) के नाम से जाना जाता है,आज ये कॉलेज एशिया का सबसे बड़ा केम्पस वाला कॉलेज है, राजा साहब ने इस कॉलेज के विकास के लिए लाखों की धनराशि व् पेश कीमती ज़मीं जायजाद दान की, इसके बाद इस कॉलेज में उनके वशंजों द्वारा हज़ारों एकड़ जमीन और लाखों रुपया दान दिया गया, इस कॉलेज का संबंध दो दो यूनिवर्सिटी, डॉ भीमराव अमबेडकर आगरा और APJ अब्दुल कलाम यूनिवर्सिटी से है। ये आगरा यूनिवर्सिटी का एक मात्र A+ ग्रेड कॉलेज है। राजा साहब की दानवीर होने की कहानी यहीं खत्म नहीं होती, उन्होंने गुरुदेव यानी कि रवीन्द्र नाथ ठाकुर की शांतिनिकेतन बनाने में बहुत मदद की, आर्थिक सहायता की।
उनके द्वारा आरबीएस कॉलेज , शांतिनिकेतन, राजा उदय प्रताप कालेज वाराणसी जैसे कई शिक्षण संस्थानों में योगदान दिया गया।
"राजा साहब ने पंडित मदन मोहन मालवीय के साथ मिल कर अंग्रेज़ी हुकूमत से लड़ाई लड़ी और हिंदी भाषा को सरकारी भाषा का दर्जा दिलवाया।"
राजा साहब ने ही 1897 में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की स्थापना की थी और प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे ।
लिखने को इतना कुछ है कि खत्म नहीं होगा, इतने किस्से हैं इस दानवीर के की कागज़ और कलम कम पड़ेंगे, उनके कारण आज देश भर में एटा ज़िले को पहचाना जाता है।
इतना सब होने के बावजूद उनके परिवार के लोग बड़ी ही सादगी के साथ अपना जीवन जीते हैं, जनता के बीच आम आदमी की तरह आते हैं। उनके वंशज राजा अनिरुद्ध पाल सिंह और उनके पुत्र युवराज अम्बरीश पाल सिंह नैनीताल में अवागढ़ स्टेट की देख रेख करते हैं, हेरिटेज होटल चलाते हैं, खेती और व्यापार करते हैं, उनके एक और वंशज राजा जितेंद्र पाल सिंह जी और राजकुमार ऋषि राज जी राजस्थान में अपने हज़ारों एकड़ के फार्म्स की देखरेख करते हैं, कई होटल चलाते हैं, नेस्ले को कॉफ़ी ब्रीड की सप्लाई जैसे कई व्यापार करते हैं,
एक और वंशज राजा यादवेन्द्र पाल सिंह जी आगरा में अवागढ़ फार्म्स की देख रेख करते हैं व खेती करवाते हैं और उनके पुत्र कुँ० भूमेन्द्र पाल सिंह दिल्ली में एक सॉफ्टवेयर कंपनी चलाते हैं। उनके सारे वंशज ईमानदारी, सादगी और शाही तरीके के साथ अपना जीवन जीते हैं।
राजकुमार ऋषिराज घुड़सवारी के महारथी हैं, वे राजस्थान में अपनी एक हॉर्स सफारी चलाते हैं, वे शूटिंग और गाड़ियों के भी काफी शौकीन हैं, वे क्षत्रिय संगठनों और हिन्दू सभाओं में अक्सर सक्रिय रहते हैं।
कुं०भूमेन्द्र पाल कम्प्यूटर्स के साथ साथ वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरी के भी शौकीन हैं और कई अवार्ड भी पा चुके हैं, वे क्षत्रिय महासभा के पदधिकारी हैं।
युवराज अम्बरीश बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी के सचिव हैं और RBS सहित 12 शिक्षण संस्थान चलाते हैं, उन्होंने अपने गृह क्षेत्र अवागढ़ में शिक्षा का स्तर बढाने के लिए राजमाता अनंत कुमारी पब्लिक स्कूल का शुभारम्भ किया है, वे अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और राजनीति में सक्रिय रहते हैं।
अवागढ़ परिवार आज भी अवागढ़ किला को अपने निजी आवास के रूप में प्रयोग करता है।
अवागढ़ का किला उत्तर प्रदेश में दूसरा सबसे बडा किला है और सबसे बड़ा निजी आवास भी है।
राजा बलवंत सिंह के देश के प्रति त्याग के कारण पिछड़े इलाके में शिक्षा का स्तर बढ़ा और उनके बनाये हुए कॉलेज से लाखों छात्रों ने शिक्षा प्राप्त की। आरबीएस कॉलेज के द्वारा क्षेत्र में हज़ारों लोगों को रोज़गार मिला, देश को कई अनमोल रत्न मिले। इस कालेज ने देश को कई रत्न प्रदान किये हैं। इस कॉलेज से पढ़कर एक व्यक्ति देश का रक्षा मंत्री व् उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना, मैं बात कर रहा हूँ देश के जाने मने नेता सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की , मुलायम सिंह के अलावा यहाँ उनके भाई राजयसभा सांसद व् सपा के प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव ने भी अपनी शिक्षा यहीं से प्राप्त की। देश के जाने माने अभिनेता, राजयसभा सांसद व् कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने बह इसी कॉलेज से अपनी पढाई पूरी की है। इसी कालेज से पढ़े हुए NAAC के डायरेक्टर डॉ० धीरेन्द्र सिंह जादौन वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के चेयरमैन बने हैं। इसके अलावा अन्य कई जाने माने चेहरों ने इसी महाविद्यालय से पढ़कर देश का नाम रोशन किया है।
क्या भारत की सरकार द्वारा इन्हें कोई सम्मान नहीं देना चाहिए ?
क्या मुलायम सिंह यादव, रामगोपाल यादव और राज बब्बर जैसे बड़े नेताओं को इनके लिए कोई आवाज़ उठानी नहीं चाहिए थी ?
भारत में जिस भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान में सरकार है उस भाजपा के संस्थापक व् प्रथम अध्यक्ष राजा बलवंत सिंह के सुपुत्र राव कृष्ण पाल सिंह जी ही थे, क्या भाजपा इस बात को भूल चुकी है, या भाजपा में बुजुर्गों का अपमान करना ही परंपरा बन चुका है ?
महाराजा बलवंत सिंह जी के कार्यों को देखते हुए उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करा जाना चाहिए, ऐसा नहीं हो रहा है तो यही कहा जा सकता है की इस देश में सच्चे ईमानदार क्रांतिकारियों की कोई इज़्ज़त नहीं है और सारे राष्ट्रीय सम्मान सिर्फ राजनेताओं के लिए ही बने हैं।
- ऋषभ चौहान (मनु)
👍
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